खिलती सी कलियों की क्यारी हो,
जब तुम आई मेरे जीवन में,
बदल गया था हर दिन मेरा
थी उथल -पुथल अब हर पल में,
सोचा था एक किताब लिखूंगी
वह सफर जो तेरे साथ शुरू हुआ
उसका हर एहसास लिखूंगी,
वह क्षण ही इतने सुंदर थे
सच कहूं तो वह रोमांचक थे,
हर क्षण में उतार-चढ़ाव चले
हर पल में कई बदलाव चले,
तेरी किलकारियों से
शुरू में थोड़ा प्यार हुआ,
पर जब वो रोके नहीं रुकती
तब तो सोचो जीना दुश्वार हुआ,
एक खौफ फैल गया मन में
आतंक सा मचा दिया घर में,
जब तुम झूले में सोती थी
सब श्श्श्श श्श्श्श करते रहते थे,
दबे - दबे कदमों से वह
तुम्हारे पास से गुजरते थे,
अब तुम मुझे पहचानती थी
तुम्हारी 'माँ 'हूँ मैं यह जानती थी,
सच कहूं ! मैं भी तो अब जान पाई
यह मां शब्द की परिभाषा पहचान पाई,
तुझको सीने से लगाकर
स्वर्ग का सुख पाती थी मैं,
अब यह घड़ी भी बदल रही थी
तुम दिन दिन चंचल प्यारी और भी प्यारी
एक सुंदर रूप में निखर रही थी,
दादा-दादी, नाना -नानी सब की राजदुलारी बन
इठला - इठला कर मचल रही थी,
तुतली -तुतली बोली तेरी
झंकृत करती मन के तार,
तेरी हर अठखेली पर मैं
मन ही मन रही नजर उतार,
ओ मेरी प्यारी बिटिया
मेरे जीवन की खुशियां है तू,
तू ही मेरा प्यार
वादा मैं तुझसे करती हूं
हर पल में तेरे संग रहूंगी,
चाहे कोई भी बाधा आए
तेरे जीवन से ही दूर करूंगी,
अब तो एक दुआ है रब से,
खुशियों का नाता ना टूटे
तेरे जीवन से।


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