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The power of your subconscious mind I द पावर ऑफ़ सबकॉन्शियस माइंड

द पावर ऑफ़ सबकॉन्शियस माइंड

आपके अंदर एक पूरा खज़ाना छुपा हुआ है,  वो आपका सबकॉन्सियस माइंड है। हो सकता है आप अभी कमजोर, गरीब, अकेले और अन सक्सेसफुल हों। ये बुक आपको अपना जीवन बदलने में मदद करेगी। द लॉ ऑफ़ अट्रैक्शन कहता है कि आप जो सोचते हैं वही आपको मिलता है। अगर आप अपने मन में सफलता, खुशी, पैसा, प्यार और फिटनेस के विचार पैदा करते हैं, तो ये सब आपको मिल सकता है।

यह बुक किसे पढना चाहिये ?

जो लोग बिमारी से लड़ रहे हैं, गरीबी, डिप्रेशन और मायूस हो गए हैं, जो लोग अपनी लाइफ बदलना चाहते हैं। आँथर के बारे में जोसेफ मर्फी आयरलैंड में एक कैथोलिक प्रीस्ट थे। लेकिन वो लॉस एंजेलिस चले गए, जहाँ वो डिवीने साइंस के मिनिस्टर बने उन्होंने साइकोलॉजी में पीएचडी हासिल की और पावर ऑफ़ द माइंड के बारे में कई बुक्स लिखीं हैं.


The power of your subconscious mind  

ये किताब ख़ास आपके लिए लिखी गई है आपको ये जानकारी देने के लिए कि आपके सबकॉन्सियस दिमाग में इतनी ताकत है जितना आप सोच भी नहीं सकते और इसकी जादुई ताकत से आपको वाकिफ कराना ही इस किताब का मकसद है ताकि आप इसका भरपूर फायदा उठा सके। 

आपके अन्दर एक खज़ाना मौजूद है एक 75 साल की विधवा ने हमारे लेखक को ख़त लिखकर बताया कि वो दुबारा शादी करके घर बसाना चाहती है और खुश रहना चाहती है। उसने वही किया जैसा लेखक ने उसे करने को बोला था। वे औरत खुद को बार - बार याद दिलाती रहती थी कि वो एक खुशहाल शादीशुदा औरत है और अपने पति से बहुत प्यार करती है और आखिर में एक दिन वो एक बड़े फार्मासिस्ट से मिली और उनसे प्यार कर बैठी। आज दोनों शादीशुदा है और खुश है। आपके अन्दर असल में एक पूरी सोने की खान है जो आपका सबकॉन्सियस माइंड है। बस अगर आप इसे कण्ट्रोल करके अपने फायदे के लिए इस्तेमाल करना सीख जाए तो क्या बात है ! आप जब किसी टेस्ट से पहले खुद को ये यकीन दिलाते रहते है कि आप फेल हो जायेंगे या फिर कोई चीज़ आपको नहीं मिलेगी तो दरअसल आप अपने ही दिमाग को ऐसा करने के लिए मजबूर कर रहे होते है। आप अपने दिमाग की सुपर पॉवर को गलत आइडिया दे रहे होते है कि आप ये नहीं कर सकते या वो नहीं कर सकते। मगर ऐसा कभी मत कीजिये कभी भी अपने दिमाग में नेगेटिव आईडीया मत आने दे बल्कि पूरे जोश के साथ दोहराते रहे, विश्वास रखे, और उम्मीद भी और फिर आप देखेंगे कि आपके सबकॉन्सियस ही आपके सारे सवालो का जवाब बन जाएगा।

 

अध्याय 2 :

आपका दिमाग कैसे काम करता है एक बूडी औरत को यकीन हो चला था कि उसकी याददाश्त चली जाएगी मगर उसने अपने दिमाग को यही यकीन दिलाये रखा कि ऐसा कुछ भी नहीं होगा। बल्कि वे खुद को यकीन दिलाती रही कि उसकी याददाश्त दिन - ब - दिन बढती जा रही है। अब ये उसका मज़बूत विश्वास ही था कि सच में उसके साथ ऐसा ही हुआ। हमारे दिमाग का कॉन्सियस और सबकॉन्सियस हिस्सा एक दुसरे से अलग होने के बावजूद आपस में जुड़े हुए है। 
जो कुछ आप सोचते है वो अपने कॉन्सियस मांइड वाले लेवल से सोचते है और जो भी आप करते है छोटी से छोटी चीज़ वे आपके सबकॉन्सियस लेवल को अफेक्ट करती है। हालांकि ये समझना ज़रूरी है कि सबकॉन्सियस और कॉन्सियस लेवल दोनों अलग -अलग नहीं है बल्कि एक ही दिमाग के दो अलग लेवल है। कॉन्सियस माइंड वो है जो सोच - विचार करता है और सबकॉन्सियस माइंड आपकी हर सोच पर विश्वास करके उसे अपना लेता है। जो कुछ भी आप सोचते है और करते है उस पर सबकॉन्सियस माइंड पूरी तरह यकीन करता है। 
उदाहरण के लिए हिप्नोसिस के पीछे सिर्फ एक वजह ये है कि आपका सबकॉन्सियस माइंड इस पर यकीन करता है और फिर आपसे जो कहा जाता है उसे आपका कोशेस माइंड बिना किसी जिद के उसे मानने लगता है। फिर आप चाहे सही या गलत जो भी विचार रखते है उसे ये बेहिचक अपनाने लगता है। तो याद रखिये कि आप अपनी कश्ती के खुद ही मालिक है, सारा कंट्रोल आपके हाथो में है तो सोच समझ कर चुने, अच्छा चुने और अपनी खुशियाँ चुने।

अध्याय 3 :

आपके सबकॉन्सियस दिमाग के काम करने की जादुई ताकत एक स्कॉच सर्जन, डॉक्टर जेम्स एस्दिले ने कुल 400 ओपरेशन किये। तब तक एनेस्तीथीसिया की खोज नहीं हुई थी जिस से वो अपने पेसेन्ट को बेहोश कर सके । 

तो उन्होंने आखिर ये किया कैसे ? अपने मरीजों को मेंटल एनेस्तीथीसिया देकर। वे उन्हें पूरी तरह यकीन दिला देते थे कि ओपरेशन में उन्हें किसी भी तरह का दर्द नहीं होगा और ना ही कोई इन्फेक्शन। उनके ओपरेशन सफल हुआ करते थे और उनका मोर्टेलिटी रेट यानी पेसेन्ट को को मारने का रेट भी बहुत कम था सिर्फ 2 या 3 % ही। अपने मरीजो का ओपरेशन करने से पहले वे उनके सबकॉन्सियस माइंड को हिप्नोटिक करके उनके कानो में बोलते थे "तुम्हे कुछ नहीं होगा, तुम ठीक हो जाओगे तुम स्वस्थ हो" आपका सबकॉन्सियस दिमाग आपका सब कुछ कण्ट्रोल करता है, आपके खून का बहाव, आपका digestion और आपके thoughts 

एक बार अगर आप इसकी ताकत समझ ले तो इसे अपने फायदे के लिए इस्तेमाल कर सकते है। जब आप नेगेटिव सोचते है तो वे आपकी डिसट्रकटिव इमोशन होती है जिसे अपने दिमाग से निकालना बेहद ज़रूरी हो जाता है। वर्ना आपकी बॉडी में अल्सर, हार्ट प्रोब्लेम्स, एंजाईटी या मेंटल इलनेस जैसे प्रोब्लेम्स होना शुरू हो जायेंगी। अपने दिमाग में उठने वाले हर ख्याल पर गौर करे क्योंकि वही फिर आपके एक्शन बनने लगते है क्योंकि जब भी आप सोचते है जो कुछ सोचते है उसे आपका सबकॉन्सियस माइंड रीएक्शन देने लगता है। तो जब भी आप सोये उससे पहले मन में एक इरादा करे, एक टार्गेट चुने और खुद से ही कहे कि आप उसे पूरा करना चाहते है। आप कुछ भी सोच सकते है। अपनी अच्छी सेहत, पैसा या फिर लोगो के साथ अपने रिश्ते के बारे में भी। पोज़िटिव विचारों को आने दे अपने दिमाग को प्रोग्राम करते रहे और फिर इसके Miracles क्या होंगे ये आप सोच भी नहीं सकते है।

अध्याय 4 और 5

मेंटल हीलिंग के पुराने और नये तरीके 1910 का एक मशहूर किस्सा है। एक आदमी को टंग पैरालिसिस हुआ यानि उसकी जीभ को लकवा मार गया। उन दिनों इसका कोई भी इलाज नही था। वो डॉक्टर के पास गया तो उसने उसकी जबान में एक थर्मामीटर रखकर कहा कि ये एक बिलकुल नया इंस्ट्रूमेंट है जिससे उसकी जीभ ठीक हो जायेगी। और सच में कुछ ही मिनटों बाद उसकी जीभ ठीक हो गयी थी और वो उसे हिला - डुला पा रहा था। बहुत से एक्सपेरिमेंट में हिप्नोसिस किये गए लोगो को आसानी से ये यकीन करा दिया जाता है कि उन्हें कोई ख़ास बिमारी है और फिर वे लोग सच में उसी बीमारी के लक्षण दिखाने लगते है। क्योंकि उनका सबकॉन्सियस दिमाग कही हुई बातो पर यकीन कर लेता है इसमें इतनी ताकत होती है कि वे उसी तरीके से एक्ट भी करने लगता है। ये अपोजिट भी काम करता है जब किसी मरीज़ के सबकॉन्सियस दिमाग को यकीन दिलाया जाता है कि वो ठीक हो रहा है। तब ऐसा लगता है कि वो कभी बीमारी का शिकार था ही नहीं। आपके शरीर पर कोई असर तब तक नहीं होगा जब तक आपका सबकौन्सियस माइंड ऐसा करने को ना बोले। हमेशा अपने सबकॉन्सियस दिमाग की ताकत को याद रखे। ना जाने आपके जीवन मे इसकी बदौलत कब क्या चमत्कार हो  जाय इसलिए कोई मौका मिस ना करे।  

आज हम सब अपने सबकॉन्सियस माइंड की पॉवर से वाकिफ है मगर हममें से बहुत से लोग इसका सही इस्तेमाल करना नहीं जानते है। उन्हें ये पता नहीं होता कि इसकी ताकत से कैसे अपनी जिंदगी को बदला जा सकता है। और ऐसा करने के लिए सबसे पहले तो ये जाने कि आपको क्या चीज़ हील करती है और फिर उसे अपने सबकॉन्सियस माइंड को गाइड करने में इस्तेमाल करे। दिमाग में कोई एक प्लान बनाये, उसे काम करता हुआ देखे, फिर बुरे या नेगेटिव ख्याल ना आने दे क्योंकि ऐसा करना बेवकूफी होगी। और आखिरी बात ये कि प्रार्थना करे और अपनी दुवाओ पर यकीन रखे।

 

अध्याय 6 :

मेंटल हीलिंग की प्रेक्टिकल टेक्निक :

जब गोल्डन गेट ब्रिज बना तो इंजीनियरिंग कंपनी के पास एक प्लान था। इस प्लान में पहली बार ( stresses and strains ) स्ट्रेस और स्ट्रेस की बात कही गयी थी जो ब्रिज पर पड़ सकता था। तब उन्होंने एक मजबूती पूरी तरह से आईडियल ब्रिज के बारे में सोचा और उसे प्रेक्टिकली टेस्ट किया गया। ये सारे स्टेप्स आर्डर में किये गए और कोई भी स्टेप पहले या बाद में नहीं अपनाया गया वर्ना ब्रिज पूरी तरह नाकामयाब रहता। जिस तरह हमारी दुआए सुनी जाती है वे भी कुछ इसी तरह है। जो हमें मिलता है ना पहले ना बाद में बिलकुल सही वक्त पर ही मिलता है। कुछ चीज़े पहले होनी होती है तो कुछ बाद में। 

इनमे से सबसे पहली टेक्निक है पास ओवर टेक्निक। सिंपल तरीके से अपने विचारो और इच्छाओ को अपने सबकॉन्सियस माइंड में रखते जाए ताकि आप किसी भी तरह की सिकनेस दूर कर पाए। जैसे कि कोई छोटी सी लड़की जिसका गला ख़राब है और बुरी तरह खास रही है वो अगर खुद से मज़बूत इरादे से कहे कि "मेरी बीमारी जा रही है, ये दूर हो रही है" तो घंटे भर बाद ही सच में वो ठीक महसूस करने लगेगी।

 

दूसरी सिंपल टेक्निक है विजुएलाइजेशन टेक्निक।

आप विजुएलाइज करके, अपने दिमाग में तस्वीर रच कर ऐसा कर सकते है। जो आप चाहते है उसे हरदम ख्यालो में रखे। आप अपने फोन या लेपटोप पर उसकी वालपेपर लगा कर भी ऐसा कर सकते है या फिर एक ड्रीम बोर्ड भी बना सकते है। या अपने सपने की फोटो कार्डबोर्ड में लगाकर रखे और रोज़ उसे देखे। आखिर में आती है स्लीपिंग टेक्निक जिसमे जब आप सो रहे होते है तो आपकी बॉडी का एफर्ट और स्ट्रेस कम होता है उस वक्त आपका सबकॉन्सियस एक्टिव हो जाता है और आपके विचार और भी बेहतर ढंग से एब्ज़ोर्ब कर लेता है जिससे आपके दिमाग और शरीर को अपनी चाही गयी चीज़ हासिल करने में मदद मिलती है। इसलिए ऑटो - सजेशन और विजुएलाइज के लिए सोने से बिलकुल पहले का टाइम सबसे बढ़िया रहता है।

 

अध्याय 7 :

सबकॉन्सियस दिमाग की आदत लाइफवार्ड है लेखक ( Robert Louis Stevenson ) रोबर्ट लुईस स्टीवनसन हर रात सोने से पहले कुछ करते थे। वे सोने से पहले अपने सबकॉन्सियस को उन सारी कहानियों से भर देते थे जो उन्हें लिखनी होती थी। और इस तरह वे कहते है कि उनके सबकॉन्सियस माइंड की डीप पॉवर उन्हें एक बढ़िया कहानी पूरी तरह तैयार करके देती है जिसे बाद में वे लिख लेते थे। उनकी इस बात से पता चलता है कि हमारी सबकॉन्सियस ताकत कितनी जबर्दस्त होती है। ज़्यादातर बच्चे हेल्दी और स्टोंग पैदा होते है, ये बहुत आम बात है मगर बीमार पड़ना और कमज़ोर होना नार्मल नहीं है क्योंकि ये लाइफ स्ट्रीम के खिलाफ है। 

सेल्फ - प्रीज़रवेशन हम इंसानों की सबसे स्ट्रोंग इंस्टिक्ट होती है। फ्रेड्ररेक एलियस एंड्रयूज एक ऐसा लड़का था जिसे पोटस की बिमारी थी जिसे स्पाइन का ट्यूबरक्लूसीस भी कहा जाता है। अपने बीमारी के दौरान वो प्रार्थना किया करता था कि वो ठीक हो जाएगा और उसकी प्रार्थना काम आई और वो सच में ठीक होकर एक तन्दुरुस्त इंसान बन गया। सोने से पहले वो उसी स्लीपिंग टेक्निक मेथड का इस्तेमाल किया करता था जिसके बारे में आपको पहले बताया गया था और ये तरीका काम आया। हर ग्यारह महीने में आपका शरीर खुद को रीन्यू करता है। अपने नेगेटिव विचारों को पोजिटिव में बदलिए क्योंकि यही स्ट्रीम ऑफ़ लाइफ है कि हम हेल्दी रहे, स्ट्रोंग बने और बिना किसी नेगेटिविटी, डर, एन्जाईटी और जलन की भावना से दूर रहे क्योंकि ये आपको बहुत सी बीमारियों का शिकार बनाती है तो इन सबसे बचने के लिए हमेशा पोजिटिव सोचे।

 

अध्याय 8 :

जो रिजल्ट आप चाहते है उन्हें कैसे पाया जाए एक बार एक मकान मालिक था जो फरनेस रीपेयरमेन से इस बात पर लड़ रहा था क्योंकि वो एक बायलर को ठीक करने के दो सौ डॉलर मांग रहा था। मकान मालिक ने कहा कि ये बहुत ज्यादा रकम है इस पर रीपेयरमेन ने जवाब दिया कि वो मिसिंग पीस के सिर्फ 5 डॉलर ही मांग रहा है बाकी के 195 डॉलर तो वो अपनी इस काम की नॉलेज होने की फीस ले रहा है। ठीक इसी तरह आपका सबकॉन्सियस माइंड भी बहुत होशियार है जिसमे पास आपके शरीर, मन और आत्मा की हर तकलीफ और दुःख दर्द करने के अनेक तरीके है। 

हमारे फेल होने का एक ज़रूरी वजह होती है कि हमारे अन्दर मोटिवेशन और कांफिडेंस की कमी होती है। क्योंकि जब लोग ध्यान लगाकर कोई प्राथर्ना कर रहे होते है तो कई बार उन्हें उस पर उतना गहरा यकीन नहीं होता जितना कि होना चाहिए। उनके मन में नेगेटिव विचार चलते रहते है और यही वजह है उन्हें अपनी प्राथर्ना का जवाब नहीं मिलता। इसलिए अपने कोंशेस और सबकॉन्सियस के बीच कोंफ्लिक्ट दूर करने के लिए सोने से पहले स्लीपिंग टेक्निक का इस्तेमाल करे। अपने सपनों को पूरा होता हुआ देखे बार - बार।

 

अध्याय 9 और 10

अपने सबकॉन्सियस की पॉवर को पैसे और अपने अमीर होने के लिए कैसे इस्तेमाल करे ?

लेखक का एक दोस्त सालाना 75,000 $ कमाता है यानी लगभग 55 लाख रुपये। वो एक बार दुनिया घूमने के लिए नौ महीने की लम्बी छुट्टी लेकर एक क्रूज़ पर गया। उसने खूब पैसे उड़ाए, मज़े किये और जब वो वापस काम पर लौटा तो उसने कुछ महसूस किया कि उनके कई साथी जो उनसे बिजनेस के बारे मे ज्यादा जानते थे, और ईवन बेहतर काम कर सकते थे । लेकिन वो सारे उनसे छोटे पोजिशन में ही रह गये थे और उनसे कम सेलरी लेते थे । ऐसा क्यो था क्योकि उन सब को ना तो अपने सबकॉन्सियस की पॉवर के बारे में ना तो कोई नॉलेज थी और ना ही कोई इंटरेस्ट। और इसलिए उनके कोई बड़े सपने भी नहीं थे। ऐसे लोग एक तरह से क्रियेटिविटी से भी कोसो दूर होते है। 

सच तो ये है कि कोई भी रातो - रात अमीर नहीं बनता सिर्फ सोचने भर से। इसके लिए आपको सबकॉन्सियस माइंड में कुछ नए आइडिया सोचने होंगे, इसे मोटिवेट करना पड़ेगा। तभी तो ये आपको अमीर बनने में मदद कर पायेगा। इसे मोटिवेशन देते रहे कि आप अमीर है, आप प्रॉफिट कमा रहे है और आपका सबकॉन्सियस जो नए विचार आपको देगा उन पर काम करना शुरू कर दे। जो आप कहे उसे पर पूरी तरह यकीन करे क्योंकि आपका सबकॉन्सियस तभी उन आईडिया को एक्सेप्ट करेगा जब आप अपने कॉन्सियस माइंड में भी उन्हें एक्सेप्ट करेंगे। 

अध्याय 13, 14 और 15 :

आपका सबकॉन्सियस और नींद, मेरिटल प्रोब्लेम्स और खुशियाँ :

एक ऐसी टेक्निक है जिसे मै पर्सनली तब अपनाता हूँ जब अगले दिन कुझे कोई काम होता है और मुझे मन में ये डर रहता है कि मै टाइम पर उठ नहीं पाऊंगा। तो मै दिमाग में सोचता रहता हूँ और खुद को यकीन दिलाता हूँ कि सुबह मै टाइम पर उठ जाऊँगा। मै तब तक इस बारे में सोचता रहता हूँ जब तक मेरे सबकॉन्सियस माइंड में ये बात पूरी तरह बैठ नहीं जाती। और फिर दुसरे दिन मै एकदम टाइम पर ही उठता हूँ। और ये टेक्निक आजतक फेल नहीं हुई, एक बार भी नहीं। ये बहुत सिंपल टेक्निक है इसमें आपको कोई अलार्म भी नहीं चाहिए हालांकि मै फिर भी अलार्म सेट करके रखता हूँ मगर हमेशा अलार्म बजने से पहले ही मै उठ जाता हूँ जिससे पता चलता है कि सबकॉन्सियस माइंड में कितनी पॉवर है। 

गाइडेंस का मतलब हमेशा किसी चीज़ से या पैसे की मदद से नहीं होता और ज़रूरी नहीं कि जब आप जागे हुए हो तभी आपको गाइडेंस मिल सकती है, कई बार आपके सपने भी आपको गाइडेंस देते है। अपने सबकॉन्सियस की पॉवर को कभी अनदेखा ना करे। इससे ना सिर्फ आपकी हेल्थ पर बुरा असर पड़ सकता है बल्कि आपकी शादीशुदा जिंदगी पर भी। किसी के साथ जिंदगी भर का सफ़र निभाने के लिए आपका रिश्ता स्प्रिचुअल होना भी ज़रूरी है। जब आप किसी से मुहब्बत किये बगैर सिर्फ पैसे, पोजीशन या अपने ईगो के लिए शादी करते है तो ऐसा रिश्ता कभी सच्चा नहीं होता। 

ऐसे रिश्ते लम्बे समय तक नहीं टिक पाते है। शादी का बंधन किसी भी चीज़ से ज्यादा स्प्रिचुअल होना चाहिए जहाँ दोनों पार्टनर के दिल एक साथ धडकते हो, जहाँ वे एक होकर जिंदगी के सफ़र में कदम रख सके। आजकल लोगो का मानना है कि शादी हर प्रॉब्लम का जवाब है। लेकिन असल में ऐसा नहीं है। किसी को अपनाने से पहले आपको इसके लिए पूरी तरह तैयार होना पड़ेगा। अगर आप खुश नहीं है तो अपने पार्टनर को कैसे खुश रख पायेंगे। अपने पार्टनर से ये उम्मीद मत कीजिये कि वे आपको हर ख़ुशी देगा। खुद को खुश रखना आपकी जिम्मेदारी है ना कि किसी और की। 

अपने सबकॉन्सियस को यकीन दिलाये कि आप अधूरे नहीं है, अपने आप में पूरे है। तभी आप किसी और से प्यार कर पायेंगे और शादी की जिम्मेदारी उठा पाएंगे। अपनी शादीशुदा जिंदगी में गलतियों को दोहराना एक बहुत बड़ी निशानी है कि आपके मन में नेगेटिव विचार भरे हुए है। आपका सबकॉन्सियस माइंड भी इन्ही नेगेटिव विचारों को अपना रहा है। अगर गलती हो गयी है तो उसे स्वीकार करके आगे बड जाए। अपने साथी और अपनी शादी में यकीन रखे ताकि आपका सबकॉन्सियस भी यही माने। हमेशा एक बात याद रखे कि शादी शुदा जिंदगी में परेशानियां आना बेहद आम बात है और इसके लिए एक्सपर्ट की सलाह लेने में कोई बुराई नहीं है। जब आपको दांत में दर्द होता है तो क्या आप इंजीनियर के पास जाते है ?  नहीं ना। 

तो आपकी शादी भी आपके दांत के दर्द से कम ज़रूरी मसला नहीं है। जब भी कोई परेशानी आये तो अपने रिश्ते को बचाने के लिए एक्सपर्ट की राय ज़रूर ले। अपने पार्टनर और एक्सपर्ट के अलावा किसी तीसरे के साथ कभी भी अपनी मेरिटल र्पोब्लेम डिस्कस ना करे। आपकी खुशियाँ सिर्फ आपके हाथ में है। अगर आप यही सोचते रहेंगे कि आपकी शादी टूटने की कगार पर है तो जानते है क्या होगा

एक दिन ये सच में टूट सकता है। क्योंकि आप ऐसा सोचते है तो आपके सबकॉन्सियस को भी यही यकीन होने लगता है। जब आप खुशियों की जगह नेगेटिव सोचंगे तो खुशियाँ कहाँ से पायेंगे ? अब सवाल है कि खुशियाँ कैसे चुनी जाये इसके लिए आपको रोज़ सुबह उठकर खुद से ही दोहराना है कि आपकी जिंदगी उपरवाले की दी हुई है और इसका कण्ट्रोल उसके हाथ में है और वो जो आपके लिय चुनेगा सबसे बढ़िया होगा। जो कुछ भी होगा एकदम बढ़िया होगा और आप हमेशा खुश रहेंगे।

 अध्याय 16,17,18 और 19 :

आपका सबकॉन्सियसमाइंड और इंसानी रिश्ते, माफ़ करना, मेंटल ब्लोक्स और डर : Sigmund Freud ( सिगमंड फ्राईड ), psychoanalysis ( साइकोऐनालिसिस ) के ऑसट्रेयन फाउन्डर कहते है कि जब किसी की अंदर प्यार नहीं होता है तो उसकी आत्मा धीरे - धीरे मर जाती है। यही बात गुडविल, रेस्पेक्ट और अंडरस्टेंडिंग के साथ भी है क्योंकि जब आप दिल में नफरत पालते है तो अपनी आत्मा और दिमाग को किसी कैदी की तरह हमेशा के लिए बाँध लेते है। जितना हो सके सबका भला सोचिये और कोशिश करे कि किसी को भी नुकसान ना पहुंचे। नफरत करने वाला इंसान का हाल वही है जो ज़हर पीता है और सोचता है कि उसे कुछ नहीं होगा। ये पागलपन है क्यों है ना

तो आप क्यों दुसरो को धोखा देते हो, हर्ट करते हो, उन्हें दुःख देते हो जब आपको पता है कि ऐसा करने से आपके दिमाग में भी ज़हर भर जायेगा, आपका खुद का नुक्सान होगा। लोगो को रेस्पेक्ट दो और उनसे हमेशा अच्छे से पेश आओ जैसा आप खुद के लिए चाहते हो वैसा व्यवहार दुसरो से करो। आप दुसरो के बारे में क्या सोचते है ये सिर्फ आपके हाथ में है, औरो के नहीं। जब आपको कोई तंग करने की कोशिश करता है तो ये आपके हाथ में है कि आप क्या रीएक्शन देंगे, दुसरो की हरकतों से आप क्या महसूस करते है ये भी सिर्फ आपके हाथ में है। 

अब चाहे आप उस बात से चिढ कर पूरा दिन खराब कर ले या फिर उनकी बातो को इग्नोर करना सीख जाए। उन्हें माफ़ करना सीख जाए। लोगो को माफ़ करना दरअसल दिमाग के लिए नेगेटिव विचारों के खिलाफ एक एंटी - डॉट की तरह काम करता है। जब आप लोगो को माफ़ करते है तो आपकी आत्मा एक शान्ति और सुकून से भर जाती है। और एक तरह से लोगो को माफ़ करके आप लाइफ को पेबैक भी करते है क्योंकि जिंदगी हमेशा आपको मौके देती है। जब कभी गलती से आपकी ऊँगली कट जाती है या पैर पर चोट लग जाती है तो आपका सब - कोंशेस भी कुछ इसी तरह आपको माफ़ करता है, उस चोट को हील करके। 

एक आदमी था जो दिन रात इतनी मेहनत करता था कि एक दिन उसे हार्ट प्रॉब्लम हो गयी उस आदमी ने कभी मुश्किल से ही अपने बच्चो के साथ वक्त बिताया था। हमारे लेखक ने उससे बात की। उसने उस आदमी को समझाया कि उसके ऐसा करने की वजह यही है कि उसे अपने बच्चो को वक्त ना देने का दुःख अंदर ही अंदर खाए जा रहा था और दिन रात कड़ी मेहनत करके वो एक तरह से खुद को सजा दे रहा था। उसे खुद को माफ़ करना सीखन होगा तभी वो खुश रह पायेगा।

हम इंसान आदत से लाचार होते है। बुरी आदत और अच्छो आदत के बीच सिर्फ एक चुनाव का फर्क होता है। आप क्या चुनते है ये आपकी मर्जी है चाहे तो आप बुरी आदत अपनाए या अच्छी सब आपके हाथ में है। बुरी आदत को दूर करने के लिए उसे इग्नोर ना करे। एडमिट करे कि वो आपकी बुरी आदत है और उसे दूर करना है। बहुत से शराबी जिंदगी भर शराब नहीं छोड़ पाते क्योंकि वे मानते ही नहीं कि वे शराबी है। उन्हें शर्म आती है ये मानने में, पछतावा होता है और उनके ईगो को ठेस पहुँचती है और नतीजा ये कि वे कभी भी इससे छुटकारा नहीं पा सकते। की राह कोई भी आदत अपनाने के लिए पहले खुद को तैयार करना होगा। 

जब आप इस पॉइंट पर आ जाये कि आपको अपनी कोई बुरी आदत छोडनी ही छोडनी है तो खुद की पीठ थपथपाये क्योंकि आपने आधा किला फतह कर लिया है। अपने सबकॉन्सियस को कंट्रोल करने में पहला रोड़ा है आपका डर। इसे दूर करने के लिए आप वही कीजिये जिसे करने से आपको सबसे ज्यादा डर लगता है। एक बार एक लेडी एक ऑडीशन देने पहुंची। हालांकि अपने स्टेज फोबिया की वजह से वो तीन बार पहले फेल हो चुकी थी। 

उसकी आवाज़ में जादू था मगर उसके नेगेटिव ख्याल उसके सबकॉन्सियस पर जमे हुए थे और इसीलिए हर बार स्टेज पर जाने के ख्याल से ही वो डर जाती थी। खुद को दिन उसने इसका जो इलाज निकाला वो बेमिसाल था। वो तीन बार कमरे में बंद कर लेती थी। एक चेयर पर बैठकर रीलेक्स होकर वो अपनी आँखे बंद कर लेती थी। फिर वो खुद में दोहराया करती कि उसके पास गज़ब की आवाज़ है जिसकी बदौलत वो किसी का भी दिल जीत सकती है। वो खुद से दस - दस बार कहती थी कि उसे स्टेज पर डर लगता। जिस दिन उसका ऑडीशन था उसके एक रात सोने से पहले उसने ये टेक्निक दोहराई और कमाल की बात है कि ये काम कर गई। वो ऑडीशन देने के लिए स्टेज पर चढ़ी, बहुत ही खूबसूरती से गाया और लोगो पर अपनी आवाज़ का जादू चला दिया !

 


अध्याय 20 :

जवाँ - दिल कैसे बने रहे हमेशा की राह लेखक के एक पडोसी को रिटायर्मेट इसलिए लेनी पड़ी क्योंकि वे 65 साल के हो गए थे। उस आदमी ने लेखक को कहा कि उसके लिए रिटायर्मेट किंडरगारटेन से फर्स्ट ग्रेड में जाने जैसा है। उसके लिए ये जिंदगी और विजडम में एक और कदम रखने जैसा है। उसका सोचना कितना सही है। हमे उम्र को इसी तरह लेना चाहिए। उम्र का मतलब सिर्फ सालो का पड़ाव तय करना नहीं है बल्कि अनुभवों और समझदारी के अलग - अलग पडावो से गुजरना है। और यही मरते दम तक चलाना चाहिए कि हम जिंदगी का भरपूर फायदा उठाते रहे। 65 से 95 साल की उम्र के बहुत से साइंटिस्ट ने यही किया है, उन्होंने जिंदगी को भरपूर जिया, अनुभव लिए और बहुत कुछ सीखा। जिन्हें मरने से, बूढ़ा होने से डर लगता है उनके अक्सर ऑर्गन फेल हो जाते है वे उम्र के नेचुरल प्रोसेस को समझना नहीं चाहते इसलिए मरने से डरते है। जब डर उनपर हावी हो जाता है तो उनके सबकॉन्सियसमें नेगेटिव विचार जमा होने लगते है जो अपने साथ बहुत सी बिमारियां लाते है। दोस्तो ये बुक Joseph Murphy ने लिखी है और इसे पबलिश किया है अमेजिंग रीडस ने और इसका सारा क्रेडिट उन्ही को जाता है । हमारा इस समरी को बनाने का मकशद सिर्फ इतना ही है कि हम लिसनर को मोटीवेट कर सके ये बुक खरीदने के लिये ।

 

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गले में खराश के क्या कारण हैं? गले में खराश की समस्या कई सारे कारणों से हो सकती है, जिनमें से मुख्य कारण निम्नलिखित हैं- जुखाम होना-  गले में खराश का सामान्य कारण जुखाम होना है। अक्सर, लोग जुखाम के लिए कोई इलाज नहीं कराते हैं क्योंकि वे इसे सामान्य समस्या समझते हैं, लेकिन कई बार यह किसी गंभीर समस्या की दस्तक हो सकती है। इसी कारण, किसी भी शख्स को जुखाम का इलाज सही तरीके से कराना चाहिए ताकि उसे गले में खराश न हो। फ्लू होना-  गले में खराश होने की संभावना उन लोगों में अधिक रहती है, जो किसी तरह के फ्लू से पीड़ित है। ऐसे लोगों को फ्लू का पूरा इलाज कराना चाहिए ताकि उसे गले में खराश होने की संभावना कम रहे। इंफेक्शन होना-  अक्सर, गले में खराश इंफेक्शन का नतीजा भी हो सकता है। हालांकि, इंफेक्शन का इलाज एंटीबायोटिक दवाइयों का सेवन करके संभव है। लेकिन फिर भी लोगों को खुद को किसी भी तरह के इंफेक्शन से बचाने की कोशिश करनी चाहिए ताकि उनकी सेहत ज्यादा खराब न हो। एलर्जी होना-  गले की खराश एलर्जी से पीड़ित लोगों को भी हो सकती है। अत: ऐसे लोगों को अपनी सेहत का विशेष ध्यान रखना चाहि...

भगवत गीता

​ भागवत गीता की सही होती बातें ​  ​ गीता  में लिखी ये 10 भयंकर बातें कलयुग में हो रही हैं सच,... ​    1.ततश्चानुदिनं धर्मः सत्यं शौचं क्षमा दया । कालेन बलिना राजन् नङ्‌क्ष्यत्यायुर्बलं स्मृतिः ॥   इस श्लोक का अर्थ है कि ​ कलयुग में धर्म, स्वच्छता, सत्यवादिता, स्मृति, शारीरक शक्ति, दया भाव और जीवन की अवधि दिन-ब-दिन घटती जाएगी. ​   2.वित्तमेव कलौ नॄणां जन्माचारगुणोदयः । धर्मन्याय व्यवस्थायां कारणं बलमेव हि ॥   इस गीता के श्लोक का अर्थ है की ​ कलयुग में वही व्यक्ति गुणी माना जायेगा जिसके पास ज्यादा धन है. न्याय और कानून सिर्फ एक शक्ति के आधार पे होगा ! ​      3.  दाम्पत्येऽभिरुचि  र्हेतुः मायैव  व्यावहारिके । स्त्रीत्वे  पुंस्त्वे च हि रतिः विप्रत्वे सूत्रमेव हि ॥   इस श्लोक का अर्थ है कि ​ कलयुग में स्त्री-पुरुष बिना विवाह के केवल रूचि के अनुसार ही रहेंगे. ​ ​ व्यापार की सफलता के लिए मनुष्य छल करेगा और ब्राह्मण सिर्फ नाम के होंगे. ​   4. लिङ्‌गं एवाश्रमख्यातौ अन्य...

जन आधार कार्ड योजना

दोस्तों जैसा कि आप जानते होंगे राजस्थान में 2014 से भामाशाह कार्ड योजना कार्य कर रही है | यह योजना पिछली वसुंधरा सरकार की ओर से शुरू की गई थी | हाल ही में सत्ता में आई गहलोत सरकार भामाशाह कार्ड योजना को बंद कर कर 1 अप्रैल 2020 से जन आधार कार्ड योजना की शुरुआत की है | इस लेख में आपको जन आधार कार्ड योजना की पूर्ण जानकारी देने की कोशिश की गई है साथ ही साथ पंजीयन रजिस्ट्रेशन की उपलब्ध जानकारी भी दी गई है अगर आप राजस्थान के रहने वाले हैं और भामाशाह कार्ड का उपयोग करते हैं आपको इस लेख को अवश्य पढ़ना चाहिए | जन आधार कार्ड योजना  दोस्तों! गहलोत सरकार ने 11 दिसंबर 2019 को हुई कैबिनेट मीटिंग में भामाशाह योजना को बंद करने का निर्णय किया है अब इसके भामाशाह योजना के स्थान पर नई योजना नाम जन आधार कार्ड योजना रखा गया है शुरू की गई। जैसा कि आप जानते हैं इससे पहले राज्य में बीजेपी सरकार थी जिसकी मुखिया वसुंधरा राजे थी | 15 अगस्त 2014 से राज्य में भामाशाह योजना चल रही थी जिसके माध्यम से तरह-तरह की योजनाओं का लाभ दिया जाता था | इसके लिए लोगों को भामाशाह कार्ड भी बांटे गए ...