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द पैरेबल ऑफ पाइपलाइन Part- 1

द पैरेबल ऑफ पाइपलाइन 

लेखक : बर्क होजेज
आप अभी मिलेनियर बन सकते हैं



आज से लगभग 100 साल पहले आम आदमी का मिलेनियर बनना लगभग असंभव था यदि जीवन शैली पर नजर डालें तो सिर्फ 10% लोग उच्च वर्गीय या मध्यम वर्गीय थे बाकी लोग गरीब की श्रेणी में आते थे। यदि हम 2001 से आगे नजर डालें तो मध्यवर्ग अब भी वेतन से वेतन तक जी रहा है। पारिवारिक घर, फर्नीचर या कार, बाइक को हटा दें तो औसत परिवार के पास कोई विशेष संपत्ति नहीं है। हालांकि पारिवारिक आमदनी बढ़ी है शिक्षा की वजह से व नौकरी के अवसर बढ़ने से परिवार में कमाने वाले सदस्य बढ़ रहे हैं लेकिन पारिवारिक खर्चे स्टेटस कायम रखने के लिए कर्ज़े व EMI और काम के घंटे व व्यस्तता भी बढ़ गई है। संयुक्त परिवार से बिखराव भी बड़ा है जिससे बूढ़े माता-पिता को बच्चों के लालन-पालन की समस्याएं बढ़ी हैं।




क्या आप गलत सिस्टम में काम कर रहे हैं?


आधुनिक शिक्षा प्रणाली, जो लॉर्ड मैकाले की ब्रिटिश शिक्षा प्रणाली की देन है उसने सिर्फ सरकारी या प्राइवेट नौकरी को कमाई का साधन बनाया है । कुछ लोग अपना छोटा मोटा बिजनेस, प्रैक्टिस आदि भी कर रहे हैं। पर कोई भी शिक्षा हमें बड़ा उद्यमी बनने की शिक्षा नहीं देती। रॉबर्ट कियोसकी के 4 कैशफ्लो क्वाड्रेंट के हिसाब से ज्यादातर 95% लोग या तो एंप्लोई है या फिर कुछ सेल्फ एंप्लोई है जो काम के बदले अपना समय बेचकर पैसा कमा रहे हैं। ये लोग सिर्फ अपना जीविकोपार्जन कर पा रहे हैं पर अमीर नहीं बन पा रहे हैं, संपत्ति नहीं बना पा रहे हैं और अपने परिवार व अपने बच्चों के लिए कोई भविष्य की सुरक्षा भी नहीं दे पा रहे हैं। इसका मुख्य कारण यह है कि बहुत सारे लोग गलत योजना पर चल रहे हैं। यह गलत सिस्टम से जुड़ गए हैं। उनके पास इस बात की बुनियादी जानकारि या समझ नहीं है कि दौलत कैसे बनाई और जोड़ी जाती है।


लेखक ने इस पुस्तक में यह बताया है कि आज मिलेनियर बनना संयोग की बात नहीं चयन का विषय है। इसके लिए तीन कदम उठाने की जरूरत है


  1.  यह समझे की दौलत कैसे बनाई और जोड़ी जाती है?
  2. दौलत बनाने के आजमाएं हुए सिस्टम की नकल करें।
  3. यह काम निरंतर करते रहें।

इस पुस्तक में बनाई बताई गई रणनीतियों का प्रयोग करके आम लोग अपने तथा अपने परिवार के लिए सच्ची वित्तीय स्वतंत्रता प्राप्त कर सकते हैं। इन्हें अपनाकर पिछले 50-60 सालों में लाखों लोग मिलेनियर बने हैं और बन रहे हैं। मिलेनियर बनना अब खुशकिस्मती पर निर्भर नहीं करता यह अब सिर्फ सीखने और दौलत बनाने की आजमाई हुई रणनीतियों के अनुसरण पर निर्भर करता है।

आज बेहतर प्रौद्योगिकी की बदौलत मध्यमवर्गीय वेतन बढ़ने की बदौलत और ई- कंपाउंडिंग यानी कि ई- चक्रवृद्धि नामक नए बिजनेस मॉडल की बदौलत हाई स्कूल या उससे अधिक शिक्षित कोई भी मध्यमवर्गीय व्यक्ति अपने धन, समय और संबंधों की लीवरेजिंग करके एक विशाल नेटवर्क द्वारा व्यक्तिगत व वित्तीय स्वतंत्रता प्राप्त कर सकता है ।

आपकी पाइपलाइन आपके जीवन की डोर हैं।

द रेबल ऑफ पाइपलाइन इटली के दो दोस्तों की कथा




           सन 1801में, इटली के एक गांव में पेबलो और ब्रूनो नामक दो महत्वाकांक्षी युवा दोस्त रहते थे। वह अमीर बनने के सपने देखते थे। प्रतिभाशाली और मेहनती थे । वह अवसर की तलाश में थे। एक दिन उन्हें अवसर मिल गया। गांव वालों ने उन दोनों को पास की एक नदी से पानी लाकर शहर के मध्य हौज में भरने के लिए नियुक्त किया। प्रत्येक दोस्त ने दो-दो बाल्टी उठाई और नदी की ओर चल पड़े। शाम तक उन्होंने शहर के हौज को लबालब भर दिया था। गांव के मुखिया ने उन्हें पानी की हर बाल्टी के लिए एकपैनी का भुगतान किया । ब्रुनो बहुत खुश था पैसे कमाकर। लेकिन पेबलो को भारी बाल्टियाँ ढोने से पीठ में दर्द हो रहा था और हाथों में छाले भी पड़ गए थे। उसे अगली सुबह फिर से बाल्टियाँ ढोने की बात सोच कर ही दहशत हो रही थी। उसने संकल्प लिया कि वह नदी से गांव तक पानी लाने का कोई ज्यादा अच्छा उपाय सोचेगा। अगली सुबह नदी पर जाने के समय पर पेबलो ने ब्रूनो से कहा "मेरे पास एक योजना है। चंद सिक्कों के बदले दिनभर बाल्टियाँ ढोने की बजाय क्यों ना हम नदी से गांव तक पाइप लाइन बना दे।" ब्रुनो ने अच्छी नौकरी का वास्ता देकर प्रस्ताव ठुकरा दिया। पेबलों ने अपनी योजना व अपने सपने पर विश्वास किया । उसने आधा दिन पार्टी बाल्टी ढोने व बाकी आधा दिन व सप्ताह के अंत में पाइप लाइन के लिए खुदाई करना शुरू कर दिया। ब्रूनो पेबलो से 10 गुना काम करके पैसा कमा रहा था वह मौज मस्ती कर रहा था और पेबलो की मजाक बनाता था। गांव वाले भी पेबलो को मजाक में पेबलो द पाइपलाइन मेन कहकर उसकी हंसी उड़ाने लगे।


            अंत में 2 साल की अथक मेहनत के बाद पेबलो ने पाइप लाइन बनाकर तैयार कर दी और गांव वालों ने जब पानी सीधे नदी से हौज में पहुंचते हुए देखा तो बड़ी खुशी से उसका स्वागत किया। निरंतर पानी की सप्लाई से गांव की समृद्धि बढ़ने लगी।अब पेबलो को बाल्टियाँ ढोने की कोई जरूरत नहीं थी। पानी निरंतर बहता रहता था भले वो काम करे या नहीं, खाना खाए या सोए और उसे निरंतर पैसा भी मिलता रहता।अब गांव वाले उसे पेबलो द पाइप लाइन मैन के बजाय पेबलो मिरेकल मैन कहकर पुकारने लगे। इधर पाइपलाइन आने से ब्रूनो का बाल्टी धोने का काम बंद हो गया और वह बेरोजगार हो गया। पेबलो ने ब्रूनो को हर गांव में पाइपलाइन बनाने के काम में पार्टनरशिप का प्रस्ताव दिया जिसे उसने स्वीकार किया। उसका यह बिजनेस प्रगति करने लग गया और उन्होंने बहुत धन कमाया।

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