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अंक ज्योतिष सम्पूर्ण जानकारी भाग - 2

अंक शास्त्र की प्राचीन और आधुनिक अंक पद्धति


Ancient and Modern Number System of Ank Jyotish



प्राचीन एवं आधुनिक अंक शास्त्रियों द्वारा अपने समय मे निम्न अंक पद्धतियां अपनाई गईं हैं। मेंक्रोस, गुडमेन, मोन्ट्रोझ, मोरीस, जेम्स ली, हेलन हिचकोक, टेयलरब जैसे पाश्चात्य देशों के अंक शास्त्रियों ने अलग-अलग पद्धतियाँ अपनाई हैं। इनमे हिब्रू या पुरानी पद्धति के रूप में डॉक्टर क्रोस, मोन्ट्रोझ, सेफारीअल की देन है। क्योंकि उसमें अंग्रेजी मूलाक्षरों को जो नंबर दिए गए हैं वह हिब्रू मूलाक्षरों के क्रमानुसार है जबकि जेम्स ली, हेलन, हिचकोक, टेयलर, मोरिस सी. गुडमेन आदि पश्चिम के आधुनिक अंक शास्त्रियों ने अंग्रेजी मूलाक्षरों के आधुनिक क्रम अनुसार नंबर दिए हैं और इसलिए इनकी पद्धति को आधुनिक अंकशास्त्र के रूप में पहचानते हैं।


अंक शास्त्र के फायदे 

अंक शास्त्र में ज्योतिष शास्त्र जैसी कठिन गणना करने की आवश्यकता नहीं पड़ती, इसमे सबसे अच्छी खासियत ये है कि जन्म के समय की जानकारी न भी हो तब भी जन्म तारीख व नाम के आधार पर ही व्यक्ति के व्यवसाय, मित्रों, भागीदारों, उसके जीवने के उतार-चढावों तथा उसके जीवन के महत्वपूर्ण समय के लाभ व हानि संबंधी बहुत सी बातें अंकशास्त्र की सहायता द्वारा जानी जा सकती है। 

अंकशास्त्र के ज्योतिष निपुणता प्राप्त करने के लिए केवल अंग्रेजी का ज्ञान तथा गणित के सरल उपयोग की ही आवश्यकता होती है । प्राचीन हिब्रू पद्धति के किरो, मोन्ट्रोझ, डॉक्टर क्रोस विद्वानों ने अंकों का ग्रहों के साथ संबंधित स्वीकार्य किया था वह संबंध इस प्रकार हैं-

सूर्य का धनात्मक अंक -1 और सूर्य का ऋणात्मक अंक -4, चंद्रमा का धनात्मक अंक -7 और ऋणात्मक अंक -2 है।

सूर्य का अंक 1, चंद्र का 2, गुरु का 3, शनि का 4, बुध का 5, शुक्र का 6, युरेनस का 7, मंगल का 8, नेपच्यून का 9, प्लूटो का 0 है। 

हिब्रू या पुरानी पद्धति में मूलाक्षरों को निम्न अंक दिए गए हैं। यह क्रम हिब्रू मूलाक्षर के क्रम अनुसार होने से अंग्रेजी मूलाक्षर के आधुनिक क्रम से सुसंगत नहीं है।

A, B, C, D, E, F, G, H, I, J, K, L, M

1,  2,  3, 4, 5,  8, 3, 5, 1, 1,  2, 3, 4,

N, O, P, Q, R, S, T, U, V, W, X, Y, Z,

5,  7,  8, 1, 2,  3, 4, 6, 6,  6,  5, 1, 7

पुरानी पद्धति में किसी को भी 9 का अंक नहीं दिया है तथा इसमें कोई निश्चित क्रम भी नहीं है लेकिन आधुनिक पद्धति में अक्षरों को 9 अंक दिया गया है जो इस प्रकार हैं.

A, B, C, D, E, F, G, H, I,

1,  2, 3, 4,  5, 6, 7, 8, 9,

J, K, L, M, N, O, P, Q, R,

1, 2,  3, 4,  5,  6, 7, 8,  9,

S, T, U, V, W, X, Y, Z,

1, 2, 3, 4,  5,  6, 7, 8,



अंकशास्त्र की पुरानी पद्धति में 11, 12 और 33 के अंकों को विशिष्ट स्थान नहीं दिया गया। जबकि आधुनिक पद्धति में 11, 22 और 33 के अंकों को विशिष्ट स्थान प्राप्त है।


0 और 1 से 9 तक के अंकों को मुख्य या मूल अंक कहा जाता है. कुछ अंकशास्त्री 0 को अंक के रूप में स्वीकार नहीं करते फिर भी उसके अंकशास्त्र में महत्व को स्वीकारते हैं. नौ अंकों के अतिरिक्त दस से आगे के अंकों को मिश्रित अंक कहा जाता है. इस प्रकार अंकों के दो प्रकार हैं. प्रथम 1 से 9 तक के मुख्य या मूल अंक और दूसरा 10 और उसके बाद के तक के मिश्र अंक हैं. कई बार मिश्रांकों मुख्य अंक में बदलने की आवश्यकता पड़ती है जैसे - 22 = 2+2 = 4, फ्लोरन्स केम्पबेल इन अंकों के बारे में कहते हैं कि ‘‘जिन्हें मास्टर नंबर (11 और 22) प्राप्त हैं वह नेतृत्व के गुणों से संपन्न होते है.



जीवन समस्याओं को हल करे अंक ज्योतिष द्वारा


‌दोस्तो,  जिस तरह हमारे जीवन में हस्तरेखा, ज्योतिष का विशेष स्थान है उसी तरह अंक ज्योतिष भी अपना अलग महत्व रखता है और यह बहुत कारगर भी है क्योंकि सरल है, आज हम इसे अंक ज्योतिष की सरल भाषा मे समझेंगे। 

ये बात तो हम सभी जानते हैं कि ग्रहों की संख्या 9 है । इसी तरह अंक शास्त्र में भी हमारी सभी गिनती का आधार अंक 9 ही हैं । इन 9 अंकों के अलावा बाकी जितने भी अंक हैं , वे उन्हीं को दोहराते हैं यानी रिपीट होते है। 

उदाहरण :
मान लीजिए कि 10 का अंक 1 + 0 = 1 होगा, 11 का अंक 1 +1= 2 होगा और इसी तरह 12 , 1 + 2 को जोड़ने से 3 का दोहराव ( पुनरावृत्ति ) है । इसी के आधार पर अंक ज्योतिष की गणना की जाती है। 





मूलांक क्या है


इसी तरह बाकी अंकों के बारे में भी जानना चाहिए । कितनी भी बड़ी राशि क्यों न हो, उसको जोड़कर एक अंक में परिवर्तित किया जा सकता है । अर्थात दो राशियों को आपस मे जोडने से जो अंक प्राप्त होता हज उसे मूलांक कहते है । इस तरह के जोड़ से जो आखिरी अंक निकलता है, उसे पहले अंकों के जोड़ का मूल कहा जाता है ।

हम लेख के इस भाग में इन शुरू के 9 अंकों के बारे में ही बात करेंगे और स्त्री - पुरुषों की जन्म - तिथि के अनुसार उन 9 अंकों के अर्थ पर विचार करेंगे । यह अंक मानव - स्वभाव के गुप्त रहस्यों को जानने की कुंजी हैं । हम इनके बारे में बड़ी सरल भाषा में बता रहे हैं ताकि इनके अर्थ और प्रतिदिन के जीवन के कार्यो पर इनके प्रभाव को आप आसानी से समझ सकें । जिन अंकों पर हम विचार कर रहे हैं वे 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8 और 9 हैं । यही अंक पिछले बहुत समय से हमारी जीवन - व्यवस्था पर नियन्त्रण रखते आ रहे हैं । व्यक्ति के जन्म - दिन से जो मूल अंक प्राप्त होता है उसका तारतम्य किसी - न - किसी ग्रह से होता है । उससे उत्पन्न होने वाला प्रभाव जीवन - भर उस व्यक्ति के साथ रहता है । यह आशा भी रहती है कि जन्म - तिथि के अंक की व्यक्ति के नाम से विशेष समानता न हो, पर नाम के अंकों के बारे में, उनके प्रभाव के विषय में हम आगे बताएंगे ।

मूलांक व भाग्यांक 


मूलांक व भाग्यांक का व्यक्ति के जीवन से गहरा संबंध होता है। होरोस्कोप न होने की स्थिति में ये फ्यूचर व सक्सेस के लिए सहायक होते हैं। 

मूलांक : 

जन्म की तारीख को ही मूलांक कहते हैं। मूलांक प्राय: 1 से 9 होते हैं। जन्म तारीख में आगे की दोनों संख्‍याओं को जोड़कर मूलांक निकाला जाता है। जैसे यदि जन्म तारीख 28 है तो मूलांक 2 + 8 = 10 = 1 होगा। विभिन्न मूलांकों का स्वामित्व विभिन्न ग्रहों द्वारा किया जाता है। 

क्या बताता है मूलांक : 


मूलांक वास्तव में लग्न या राशि का कार्य करता है। यह व्यक्ति के स्वभाव व शरीर संरचना की जानकारी देता है। यह व्यक्ति के ‍चरित्र की व्याख्‍या करता है, उसके मिजाज व स्वास्थ्य को बताता है।

भाग्यांक : 


जन्मतिथि के सभी अंकों का योग करके जो अंक प्राप्त होता है वह भाग्यांक कहलाता है। जैसे यदि आपकी जन्मतिथि 2-3-1970 है तो कुल योग 2+3+1+9+7+0 = 22 =2+2=4 होगा। अत: इस जन्मतिथि का भाग्यांक 4 होगा।


विशेष : अंक ज्योतिष के आधार पर नाम की स्पेलिंग बदलना मुख्‍यत: भाग्यांक पर ही आधारित होता है।


व्यक्ति के नाम के अक्षर को अंग्रेजी में लिखकर जैसे ANIL SHARMA प्रत्येक अक्षर के अंक को निश्चित करके किरो पद्धति द्वारा नाम का मूलांक निकाला जाता है। यही नही व्यक्ति के जन्म के दिनांक, मास और साल के अंकों का योग करके जन्म तिथि के मूलांक को निकाला जाता  है।  पुनः इसी मूलांक को मुख्य आधार मानकर वर्ष, मास, दिनांक के अंको से मित्र शत्रु आदि सम्बन्धानुसार भविष्यवाणी की जाती है।

जैसे ANIL SHARMA 

                    A   N   I    L     S  H A  R M A 
                   
                   1+ 5 + 9+ 3     1+8+1+9+4+1 
मूलांक                   9                       6  
मूलांक                   6 हुआ 

और जन्म तारिक के अनुसार देखे 
जैसे ANIL SHARMA की जन्म तारिख 27/03/1982 है तो 

                    2  +  7     9  मूलांक हुआ 

                    2  +  7  +  3   +  1 +  9   +  8   +  2    =    5  भाग्यांक हुआ।  
अब आप मूलांक और भाग्यांक के बारे में समझ गे होंगे।  
आप अपना खुद की जन्म रातिक के अनुसार अपना मूलांक और भाग्यांक निकलकर देख सकते है, आगे के लेख में हु आपको बताएँगे की हर भाग्यांक का भाग्य फल क्या होता है।   1 से 9 तक के सभी अंको के भाग्य फल क्या होते है।  

अगर हमारा ये लेख आपको अच्छा लगे तो अपने चित परिचित लोगो में share जरूर कर हम पर कृपा करे।  
धन्यवाद 



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