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क्या ज्यादा देर तक बैठे रहने से नुकसान है ?


हालिया अध्ययनों से पता चला है कि जो लोग दिन में ज़्यादातर समय बैठे रहते हैं, उन्हें हार्ट अटैक, यहाँ तक कि असमय मृत्यु का भी ज़्यादा ख़तरा रहता है । सामान्य मान्यता के विपरीत, मेयो क्लीनिक के एक अध्ययन ने उजागर किया कि दिन में एक घंटे जिम जाने से भी दिन में छह घंटे या इससे ज़्यादा समय तक बैठने से होने वाले नुकसान की भरपाई नहीं होती या उसके जोखिम कम नहीं होते । लेकिन यह हर उस चीज़ के विपरीत नज़र आता है, जो हम व्यायाम के बारे में जानते हैं । लेकिन यहाँ मुद्दे की बात व्यायाम नहीं है, असल समस्या तो लंबा बैठने की निष्क्रिय अवधि है । 


क्या कारण है 
जब हम बैठे होते हैं, तो हमारी मांसपेशियाँ एक तरह की सुषुप्तावस्था में चली जाती हैं, जिससे हमारा शरीर केके 1 नामक एंजाइम को बंद कर देता है, जो रक्त में वसा को तोड़ता है । इसके अलावा हमारे चयापचय और अच्छे कोलेस्ट्रॉल बनने की दर भी धीमी हो जाती है । इन नाटकीय निष्कर्षों की व्याख्या यह है कि शरीर को गुरुत्वाकर्षण के नीचे जाने वाले प्रवाह की ज़रूरत होती है । इसके बिना हृदय जोखिम में आ जाता है, रक्त का परिमाण कम हो जाता है, मांसपेशियाँ कमज़ोर होने लगती हैं पर भी विपरीत प्रभाव पड़ता है ।


समाधान क्या है 

एक पुस्तक जिसका नाम "एक छोटा सा कदम आपकी ज़िंदगी बदल सकता है" के लेखक रॉबर्ट माउरर ने बताया है कि इस डरावनी तस्वीर का बहुत ही आसान समाधान है काइज़न ( काइज़न यानी छोटे छोटे कदमो का इस्तेमाल करके अपने बड़े लक्ष्य हासिल करना । इसका एक शक्तिशाली कथन है कि एक हज़ार मिल लंबी यात्रा भी एक कदम से ही शुरू होती है।) यानी कि आप बैठने के बजाय सिर्फ़ खड़े होने से ही आपकी चयापचय दर दोगुनी हो जाती है । अगर आप बस थोड़ी दूर तक ही पैदल चलते हैं, तो इससे आप उस दर को दोबारा दोगुना कर देते हैं ।
1. हर 5 से 7 मिनट में अपनी जगह से उठ जाए और थोड़ा घूम ले । 
2. अपनी जगह पर ही बैठ कर अपने हाथों की ऊपर की ओर ले जाकर मूवमेंट करे । स्ट्रेचिंग करे । 
3. अपनी आंखों को कम से कम 20 सेकण्ड तक आराम दें। 
4. थोड़ी देर में जब समय मिले पूरी लंबी सांस ले।। अपने फेफड़ों को हवा से पूरा भर ले और धीरे धीरे बाहर छोड़े । इसे तीन से चार बार दोहराये । 

इस कहानी का सबक़ : 
ज़्यादा बैठने से स्वास्थ्य का जो जोखिम है, उसका समाधान बहुत बड़ा और टेढ़ा नहीं है - जैसे कि हर दिन एक घंटे तक जिम जाना ।


इसका एक छोटा समाधान भी है और यह कामयाब भी होता है । हर घंटे डेस्क से उठने, चहलकदमी करने, यहाँ तक कि हिलने - डुलने या कसमसाने से भी शरीर ज़्यादा कारगर तरीके से काम करता है ।




यह पुस्तक 
एक छोटा सा कदम आपकी ज़िंदगी बदल सकता है
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