मधुमेह के निदान के लिए कौन-कौन से परिक्षण किए जाते हैं ?
- बेनेडिक्ट टेस्ट
- ग्लूकोज आक्सीडेज टेस्ट
- खाली पेट रक्तशर्करा की जाँच
- भोजन लेने या 75 से 100 ग्राम ग्लूकोज लेने के बाद रक्त शर्करा की जाँच
- ग्लूकोज टोलरेंस टेस्ट
क्या घर में भी रक्त शर्करा (ब्लड शुगर) की जाँच की जा सकती है ?
हाँ। ग्लूकोमीटर उपकरण की सहायता से रक्त के स्तर की जाँच घर में भी की जा सकती है। के स्तर की जाँच घर में भी की जा सकती है। मधुमेह का रोगी इस उपकरण से यह जान सकते है कि उसकी रक्त शर्करा का स्तर क्या है तथा उसका रोग नियंत्रण में है अथवा नहीं। ऐसे रोगियों के लिए जिनकी रक्त शर्करा का स्तर बार–बार घटता-बढ़ता रहता है, यह विधि अत्यंत उपयोगी है। ऐसे रोगियों को चाहिए की प्रत्येक बार जाँच के पश्चात् रक्त में शर्करा के स्तर को डायरी में नोट करते रहें ।
दिनांक समय रक्त शर्करा का स्तर टिप्पणी
10.1.2008 8.00 बजे 140 एम जी./डी.एल.
एक स्वस्थ व्यक्ति के रक्त में शर्करा का सामान्य स्तर क्या होना चाहिए?
ऐसे लोगों में जिन्हें मधुमेह नहीं है प्रात: खाली पेट रक्त शर्करा का स्तर ( रात भर उपवास करने के पश्चात् ) 90 मि. ग्रा./डीएल. तथा भोजन के पश्चात् 145 मि. ग्रा./डीएल. होना चाहिए। अनियंत्रित मधुमेह की स्थिति में यह 500 मि. ग्रा./डीएल. या इससे भी अधिक हो सकता है।
क्या मधुमेह कई तरह के होते है? मधुमेह को दो प्रमुख भागो में बांटा गया है । ये हैं –
1 . टाइप वन –इन्सुलिन पर निर्भर मधुमेह
पहले वर्ग में किसी भी कारणवश अग्नाशय पर्याप्त मात्रा में इन्सुलिन का निर्माण नहीं कर पाता है। फलस्वरूप ऐसे रोगियोँ को इन्सुलिन देकर शर्करा के चयापचय के योग्य बनाया जाता है। इसलिए इस वर्ग के रोगियों को टाइप वन मधुमेही या इन्सुलिन पर निर्भर मधुमेही कहते हैं। यह प्राय: बच्चों तथा युवाओं में पाया जाता है। इसे जूवेनाइल डायबिटीज भी कहते हैं। अधिक आयु वर्ग के लोग भी इससे पीडि़त हो सकते हैं
2. टाइप टू – इन्सुलिन पर अनिर्भर मधुमेह
इस वर्ग में अग्नाशय से पर्याप्त इन्सुलिन निकलता तो है लेकिन वह ठीक से इस्तेमाल नहीं हो पाता। ऐसे रोगियों को खाने वाली दवाएँ देकर शर्करा के चयापचय के योग्य बनाया जाता है। इसलिय इस वर्ग के रोगियों को टाइप टू मधुमेही या इन्सुलिन पर अनिर्भर मधुमेही कहते हैं। यह अधिकतर प्रौढ़ावस्था में होता है। पर जीवन शैली में होने वाले नकारात्मक परिवर्तनों के फलस्वरूप अब यह किशोरों और बच्चों में भी पाया जाने लगा है। इस वर्ग के रोगी अधिकांशत: मोटापे से ग्रस्त होते हैं। रोगियों में रोग के लक्षण धीरे-धीरे प्रकट होते हैं तथा कई बार तो इस प्रक्रिया में वर्षों लग जाते हैं ।
जयपुर मेडिकल एसोसिएशन की ओर से जनवरी 1997 में "मधुमेह के उपचार में नवीनतम विकास" विषय पर आयोजित एक गोष्टी में अमेरिका के मेयो क्लिनिक एंड मेडिकल स्कूल के बारे में बता गया की यदि फास्टिंग ग्लूकोज का स्तर 200 मिलीग्राम से कम हो तो दवा के स्थान पर व्यायाम, भोजन पर नियंत्रण और आहार में परिवर्तन लाकर रोग का उपचार करना चाहिए। उन्होंने बताया की भारत में अमेरिका से अधिक वृद्ध अवस्था वाले मधुमेह रोगी हैं । उनका कहना था की रोग से बचाव के लिए उच्चरक्तचाप, धूम्रपान, मोटापा और रक्त में कोलेस्ट्रोल की मात्रा पर नियंत्रण रखना चाहिए । इसके आतिरिक्त तनाव जन्य मधुमेह भी काफी उभर कर सामने आ रहा है । कई चिकित्सा इसको एक अलग वर्ग के रूप में मान्यता देते हैं ।
प्री- डायबिटीज क्या हैं?
प्री- डायबिटीज उन लोगों को कहते हैं जितने रक्त में चीनी की मात्रा ज्यादा होती है । पैरों और साँस से आ रही बदबू से ऐसे लोगों की पहचान की जा सकती है । प्री-डायबिटीज वह स्थिति है, जब खून में शुगर लेवल खतरे के निशान से ठीक करीब होता है। डॉक्टर कहते हैं कि यदि किसी मरीज में प्री-डायबिटीज का समय रहते पता चल जाए और इलाज कर दिया जाए तो डायबिटीज और इसके जानलेवा खतरों से बचा जा सकता है। प्री-डायबिटीज को बॉर्डरलाइन डायबिटीज भी कहा जाता है। आईडीएफ डायबिटीज एटलस के मुताबिक भारत 7.29 करोड़ लोग डायबिटीज के मरीज हैं। 8 करोड़ लोग प्री-डायबिटीज स्टेज में हैं और अफसोस की बात है कि महज 10 फीसदी को अपनी इस स्थिति की जानकारी है।
प्री-डायबिटीज के स्पष्ट लक्षण नहीं
प्री-डायबिटीज के स्पष्ट लक्षण नहीं होते हैं। जिस कारण अधिकांश लोगों को इसका पता भी नहीं चलता है। इसका पता लगाने के लिए डॉक्टर ब्लड शुगर और ब्लडप्रेशर की जांच करता है। वैसे इसके सामान्य लक्षणों में शामिल हैं - बार-बार पेशाब आना और प्यास बढ़ना।
- टाइप 2 मधुमेह का पारिवारिक इतिहास होना
- नियमित रूप से हाई-शुगर ड्रिंक्स का सेवन
- हाई ब्लड प्रेशर
- हाई ब्लड फेट या ट्राइग्लिसराइड्स
- पर्याप्त व्यायाम नहीं करना
- मोटापा, विशेष रूप से पेट का मोटापा
- तनाव का बढ़ा हुआ स्तर
- धूम्रपान या बहुत अधिक शराब पीना
मधुमेह की जटिलताएँ क्या-क्या हैं?
- रोगी को बार- बार संक्रमण होना
- घाव होने पर आसानी से न भरना
- दृष्टि पटल विकृति
- तंत्रिका विकृति
- मधुमेह कीटोन अम्ल्यता
- हृदय वाहिकीय विकृति
- मूत्रमार्ग का संक्रमण
मधुमेह से ग्रस्त व्यक्ति के शरीर में क्या प्रक्रिया होती है?
जब हम शर्करा को समुचित रूप से इस्तेमाल नहीं करते तो हमें अधिक भूख महसूस होती है क्योंकि शरीर को ऊर्जा देने वाले भोजन की आवश्यकता होती है। रक्त शर्करा कार्बोहाइड्रेट युक्त खाद्यपदार्थ शर्करा एवं स्टार्च का व्यूप्तपाद्य है। भोजन के पाचन के फलस्वरूप स्टार्च शर्करा में परिवर्तित हो जाते हैं। एक साधारण व्यक्ति में शर्करा की तात्कालिक आवश्यकता से ऊपर की अतिरिक्त मात्रा संग्रहित कर ली जाती है जबकि मधुमेह से ग्रस्त व्यक्ति में यह क्रिया सफलतापूर्वक संपन्न नहीं हो पाती इसलिए गुर्दों को शर्करा की अतिरिक्त मात्रा को मूत्र उत्सर्जन तंत्र के द्वारा शरीर से बाहर निकलना पड़ता है।
मधुमेह के संदर्भ में कई बार इन्सुलिन का उल्लेख आता है।
यह इन्सुलिन क्या है?
इन्सुलिन एक हार्मोन है जो अग्नाशय की कोशिकाओं में उत्पन्न होता है। रक्त परिसंचारण में स्रावित किए जाने पर यह उपापचय एवं शर्करा की उपयोगिता का अवसर देता है । इसकी खोज 1921 में हुई थी। उससे पहले मधुमेह से ग्रस्त व्यक्तियों के लिए इलाज की बहुत ज्यादा गुंजाइश नहीं थी। इन्सुलिन का आविष्कार होने पर इसे मधुमेह से पीडि़त लोगों के लिए जीवनदायी औषधि माना गया ।
ऐसा माना जाता है कि इन्सुलिन, मधुमेह से पीडि़त व्यक्तियों को भी अन्य व्यक्तियों की तरह सामान्य जीवन जीने का अवसर प्रदान करती है पर इसके लिए यह आवश्यकता है की मधुमेह से ग्रस्त व्यक्ति खाने-पीने के बारे में कुछ पूर्व निश्चित नियमों का पालन करे और इन्सुलिन की निर्धारित मात्रा अपने शरीर में पहूँचाता रहे। भोजन नियंत्रण में ऐसे व्यक्ति को मादक द्रव्यों एवं मिठाइयों आदि से स्थायी रूप से दूर रहने के लिए कहा जाता है। इसके साथ ही मधुमेह से ग्रस्त व्यक्ति को उन तरीकों से रहने और उन पदार्थों को खाने की आदतों को परिवर्तित करने के लिए कहा जाता है जो मधुमेह उत्पन्न कर सकता हैं।
इन्सुलिन प्रतिक्रिया किसे कहते हैं ?
इन्सुलिन की अधिक मात्रा शरीर में पहुँच जाने पर रक्त में शर्करा की मात्रा न्यून हो जाती है। इस स्थिति को हैपोग्लैसिमिया कहते हैं तथा इस प्रतिक्रिया को इन्सुलिन प्रतिक्रिया कहा जाता है। इस प्रतिक्रिया में सिर में हल्कापन, कांपना, अशस्क्त्ता, पसीना आना एवं भूख आदि लक्षण उत्पन्न हो सकते हैं। गंभीर प्रतिक्रिया की स्थिति में मधुमेह से ग्रस्त रोगी अपनी चेतना खो सकता है। दूसरी ओर इन्सुलिन की मात्रा में कमी, अधिक मात्रा में वसा अम्लों को एकत्र कर देती है । यह पूरे तंत्र की विषाक्त बना देते हैं जिसे रक्ताम्लता कहते हैं। अंततोगत्वा यह स्थिति मधुमेही संमूर्छा में बदल जाती है और यदि तत्काल इसकी चिकित्सा न की गयी तो रोगी जीवन को खतरा हो सकता है। साधारणत: आजकल मधुमेही संमूर्छा की स्थिति नहीं आने पाती लेकिन आपने आहार के प्रति लापरवाही बरतने एवं इन्सुलिन लेने वाले रोगियों द्वारा उसकी समुचित मात्रा न लेने से कभी भी यह स्थिति आ सकती है ।
डायबिटीज में क्या करे क्या न करे
आज के युग में इंसान स्वस्थ काम और बिमारियो से ज्यादा घिरा हुआ रहता हैं। उसे पता भी नहीं चलता और शरीर में कोई न कोई रोग आ जाता हैं। इसका सबसे बड़ा कारण हैं की लोग आज कल अपनी सेहत के प्रति लापरवाह हो गए हैं। ऐसा सबके साथ नहीं हैं। परंतु ज्यादातर लोग अपनी सेहत का ध्यान नहीं रखते। जैसे समय पर खाना न खाना, रात भर जगे रहना, ज्यादा बाहर का खाना आदि ये सब कुछ बाते हैं। जिनके प्रति लोग सचेत नहीं रहते।
डायबिटीज से आज के समय में बहुत लोग परेशान हैं। इसमें पुरुषो के साथ महिलाएं भी शामिल हैं। इसमें शरीर में इन्सुलिन की मात्रा कम हो जाती हैं। और ग्लूकोस की मात्रा रक्त में बाद जाती हैं। इस रोग को चीनी की बीमारी भी कहते हैं। इस बीमारी में मरीजों में रक्त कोलेस्ट्रॉल, वसा के तत्व भी असामान्य हो जाते हैं। डायबिटीज से बीमार रोगियो को कोई भी बीमारी चाहे वो शरीर के किसी भी हिस्से से सम्बंधित हो बहुत जल्दी पकड़ती हैं। इसलिए ये रोग न ही हो तो अच्छा हैं।
डायबिटीज का मतलब अपने जीवन का अंत नहीं हैं। बल्कि इसका मतलब हैं। की इस रोग के हो जाने के बाद हमें अपने शरीर की ज्यादा देखभाल की जरुरत होती हैं। इसमें यदि हमारे शरीर के किसी अंग पर चोट लग जाये । तो कई बार उसका ठीक होना असंभव हो जाता हैं। इस रोग में चोट लगे अंग के कारण शरीर में इन्फेक्शन, न फ़ैल जाये इसलिए कई बार उसे काटना भी पड़ता हैं। इसलिए अपना ज्यादा से ज्यादा ध्यान रखना पड़ता हैं।
डायबिटीज के रोगियो को अपने खाने पीने में भी बहुत सावधानी बरतनी पड़ती हैं। चीनी से परहेज रखना पड़ता हैं। डायबिटीज के रोगियो के लिए जमुन सबसे ज्यादा फायदा करता हैं। आलू बहुत ज्यादा नुक्सान करता हैं। चीनी का ज्यादा मात्रा में सेवन कई बार जानलेवा भी हो सकता हैं। इसी कारण कहा जाता हैं, की डायबिटीज के रोगियो के लिए मीठा जहर के समान हैं। कभी भी बिना डॉक्टर की सलाह के कोई भी कम आपकी सेहत के लिए हानिकारक साबित हो सकता हैं।
डायबिटीज के रोगी के लिए ये एक खतरनाक बीमारी है। जिसे अगर सही वक़्त पर रोका ना जाये और इसके लिए उपचार न किया जाये तो इसका परिणाम जानलेवा भी हो सकता है। आज भारत में 4.5 करोड़ व्यक्ति डायबिटीज का शिकार हैं।इसके प्रमुख कारण है खानपान, समय पर न करना, मानसिक तनाव के कारण , मोटापा की समस्या , व्यायाम की कमी, दिनचर्या का सही न होना, आदि। इसी कारण यह रोग हमारे देश में बड़ी तेजी से बढ़ रहा है।
आइये जानते हैं किस प्रकार से इस रोग का उपाय किया जा सकता हैं और इस रोग से बचने के लिए क्या-क्या करना चाहिए। और क्या नहीं। क्या जरुरी हैं इस रोग की रोकथाम के लिए।
पर आप कुछ भी बिना किसी डॉक्टर की सलाह के न करे। तो ये बाते हैं जिनसे आप को डायबिटीज के रोग से आराम मिल सकता हैं। और क्या नहीं करना चाहिए ये भी आपको बता रहे हैं।फलो और सब्जियों का सेवन करे-
डायबिटीज के रोगी के लिए जामुन सबसे ज्यादा फायदेमंद होता हैं। इसके आलावा आँवला, निम्बू, खरबूजा , तरबूज , पपीता आदि का सेवन करना बहुत ही फायदेमंद हैं। इसके साथ मोसंबी, अमरुद भी खा सकते हैं। दिन में डायबिटीज के रोगी को कम से कम दो से तीन बार फलो का सेवन करना चाहिए। मैथी, साग, घीया, तरोई, पालक, सेम, भिन्डी, शिमला मिर्च आदि का सेवन करना चाहिए।
वजन घटाना चाहिए :-
किसी भी रोग के बढऩे का कारण ज्यादा वजन होता हैं। और डायबिटीज के रोगी के लिए वालन बहुत नुक्सान करता हैं। इसलिए यदि आप मोटे हैं तो सबसे पहले आप अपना वजन कम करिये। इसके लिए आपको खाना खाने का त्याग बिलकुल नहीं करना हैं। क्योंकि डायबिटीज के रोगी को थोड़े समय के बाद कुछ न कुछ कहते रहना चाहिए। इसलिए आप वजन कम करने के लिए हेल्थी और कम वसा वाला खाना खाये।
व्यायाम करे-
किसी भी बीमारी को ख़तम करने लिए व्ययाम बहुत आवश्यक हैं। डायबिटीज के रोगी को ज्यादा देर तक कभी भी बैठे नहीं रहना चाहिए। क्योंकि ये उसके लिए नुक्सान हो सकता हैं। इसलिए उन्हें व्ययाम करना चाहिए। कम से कम सुबह जल्दी उठ कर तो जरूर करना चाहिए। इससे शरीर तंदरुस्त रहता हैं।
चोट की देखभाल करे-
डायबिटीज के रोगी को यदि कहि चोट लग जाये तो ये उसके लिए बहुत नुक्सान होता हैं। क्योंकि कई बार इस चोट का ठीक होना मुश्किल होता हैं। और इसकी वजह से खतरा उत्तपन हो जाता हैं। इसलिए साफ़ सफाई का पूर्ण रूप से ध्यान रखे ताकि इन्फेक्शन न फैले।
पानी भरपूर मात्रा में पिए-
डायबिटीज के रोग के लिए ही नहीं बल्कि सभी रोगों के लिए पानी बहुत फायदे मंद होता हैं। इसलिए दिन में अधिक से अधिक पानी का सेवन करे और अपने शरीर का ध्यान रखे। ज्यादा पानी पीने से शरीर की सारी अशुद्धियां यूरिन के रास्ते बाहर न्यूइक्ल जाती हैं।
पूरी नींद ले-
डायबिटीज के रोगी को अपनी नींद पूरी लेनी चाहिए। इससे आपके शरीर को आराम मिलता हैं। और थकान की समस्या दूर होती हैं। जल्दी से सास नहीं चढ़ता आदि। इसीलिए कोशिश करे दिन में कम से कम आठ घंटे जरूर सोये।
डायबिटीज के रोगी क्या न करे-
- ज्यादा नमक का सेवन नहीं करना चाहिए।
- ज्यादा चीनी का सेवन नहीं करना चाहिए।
- ज्यादा वसा वाले पदार्थो का त्याग करना चाहिए ।
- कोल्ड ड्रिंक या कोई भी मिलावटी ड्रिंक का सेवन नहीं करना चाहिए।
- बाहर के खाने का त्याग करना चाहिए।
- मानसिक तनाव नहीं लेना चाहिए। या किसी चीज का दिमाग पर बोझ नहीं डालना चाहिए।
- लाल मॉस नहीं खाना चाहिए।
- धूम्रपान व् अल्कोहल का सेवन नहीं करना चाहिए।
- मीठा डाल कर चाय नहीं पीनी चाहिए। सेहत के लिए हानिकारक होता हैं।
तो ये कुछ बाते हैं जिनका ध्यान रखकर आप डायबिटीज के रोग से मुक्ति पा सकते हैं। अपने शरीर की यदि आप सही ढंग से और नियमित रूप से आप देखभाल करेगे तो आप अपने शरीर को हर रोग से बचा सकते हैं। परंतु यदि आप ही अपने शरीर के प्रति लापरवाह हो जायेगे। तो इसकी वजह से आपको नुकसान होगा। आपका शरीर में किसी रोग का होना आपके साथ में आपके घरवालो को भी परेशान करता हैं। इसलिए जितना हो सके अपने शरीर का ध्यान रखना चाहिए।
डॉक्टर से अपने शरीर का नियमित रूप से चेकअप करवाना चाहिए। शरीर में आई किसी भी बीमारी का जल्द से जल्द इलाज़ करवा ही समझदारी हैं। क्योंकि यदि समय पर किसी बीमारी का इलाज़ न करवाया जाये तो , आपको कई बार बहुत बड़ी समस्या उत्तपन हो जाती हैं। जो आपके लिए बहुत हानिकारक हो सकती हैं। इसीलिए अस्वस्थ रहे अपना ध्यान रखे, समय पर आहार ले, व्ययाम करे, आदि। क्योंकि स्वस्थ शरीर ही स्वस्थ आदमी की निशानी होती है।










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