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डायबिटीज के क्या-क्या लक्षण होते है? (Part 02)

            
              आज के समय में बीमारियां होना आम होता जा रहा है। बच्चे हो या बड़े, जवान हो या बूढ़े हर कोई किसी न किसी बीमारी से परेशान दिखाई पड़ता है। मधुमेह एक ऐसी बीमारी है जिससे यदि कोई व्यक्ति एक बार ग्रस्त हो जाए तो यह जिंदगी भर उसका साथ नहीं छोड़ती।

              ऐसे तो इस बिमारी को पता लगाने के लिए बहुत से टेस्ट और परीक्षण किये जाते है लेकिन उन सभी को करने में बहुत से पैसे खर्च होते है और कई बार इलाज में देरी समस्या के बढऩे का कारण बन जाती है। ऐसे में इसे बढऩे से पहले ही पहचान लेना अच्छा होता है।

            लेकिन सभी इस बीमारी के शुरूआती लक्षणों के बारे में नहीं जानते और अज्ञानता के कारण इलाह में देरी हो जाती है। यदि मधुमेह के शुरूआती लक्षणों को पहचान कर इसका इलाज सही समय से करा दिया जाए तो इलाज में आसानी होती है। कई लोगों को इस बीमारी का पता बहुत समय बाद लगता है जिसकी वजह से समस्या और अधिक गंभीर हो जाती है।डायबिटीज के क्या-क्या लक्षण होते है

           वास्तव में डायबिटीज, लाइफस्टाइल संबंधी और वंशानुगत बिमारी है। जब शरीर में पेनक्रियाज नामक ग्रंथि इन्सुलिन बनना बंद कर देती है तब मधुमेह की बीमारी होती है। इन्सुलिन ब्लड में ग्लूकोस को नियंत्रित करने में मदद करता है। ऐसे में जब इसका निर्माण बंद हो जाता है तो रक्त में ग्लूकोस की मात्रा बढऩे लगती है।

यहाँ हम आपको मधुमेह के कुछ शुरूआती लक्षणों के बारे में बताने जा रहे है जिनकी मदद से आप इस बीमारी को बढऩे से पहले ही रोक पाएंगे।

मधुमेह के शुरूआती लक्षण -

1. थकान महसूस होना
       
डायबिटीज के होने पर शुरूआती दिनों में व्यक्ति को सारा दिन थकान महसूस होती है। रोजाना की भरपूर नींद लेने के बाद भी सुबह उठते ही आपको ऐसा लगेगा की अभी आपकी नींद पूरी नहीं हुई है और शरीर में थकान भी महसूस होगी। यह सबसे सीधा और आसान कारक है जिससे यह पता चलता है की खून में शुगर का लेवल बढ़ता जा रहा है।

2. बार-बार पेशाब आना
          मधुमेह की समस्या होने पर व्यक्ति को बार बार पेशाब आता है। दरअसल, जब शरीर में ज्यादा मात्रा में शुगर इकठ्ठा हो जाता है तो यह पेशाब के रास्ते बाहर निकलता है, जिसके कारण डायबिटीज के मरीज को बार बार पेशाब आने की समस्या शुरू हो जाती है।

3. अधिक प्यास लगना
         मधुमेह की समस्या होने पर रोगी को बार बार प्यास लगती है। क्योंकि पेशाब के रास्ते से शरीर का पानी और शुगर बाहर निकल काटा है जिसके कारण प्यास लगने जैसी स्थिति बनी रहती है। लोग अक्सर इस बात को हलके में ले लेते है और समझ नहीं पाते की उनकी बीमारी की शुरुवात कब हो गयी।

4. आंखे कमजोर होना
          मधुमेह का रोग होने पर सबसे अधिक प्रभाव आँखों पर ही पड़ता है। डायबिटीज के मरीज को रोग होने पर सबसे पहले आँखों की रोशनी कम होने लगती है और धुंधला दिखाई देने लगता है। किसी भी वस्तु को देखने के लिए उसे आँखों पर जोर डालना पड़ता है।

5. वजन का कम होना
        मधुमेह के रोग की शुरुआत होने पर व्यक्ति का वजन तेजी से कम होने लगता है। सामान्य दिनों की अपेक्षा व्यक्ति एकाएक कम होने लगता है।

6. भूख लगना

         मधुमेह के मरीज का वजन तो कम होता है लेकिन उसकी भूख में बढ़ोतरी होती है। जी हां, मधुमेह का रोग होने पर व्यक्ति की भूख कई गुना बढ़ जाती है। उसे बार बार खाने की इच्छा होती है। अगर आपके साथ भी ऐसा है तो समझ ले की आप भी मधुमेह के घेरे में आ चुके है।

7. घाव न भरना
          अगर आपके शरीर में चोट या कहीं घाव हो जाए और वह जल्दी न भरे, फिर चाहे वो छोटी से खरोंच ही क्यों न हो, वह धीरे धीरे बड़े और गंभीर घाव में बदल जाएगी। उस चोट में संक्रमण के लक्षण साफ़ साफ दिखाई देने लगेंगे। तो समझ लें मधुमेह की शुरुवात हो चुकी है।

8. तबियत खराब रहना
        डायबिटीज के मरीज के शरीर में कोई भी संक्रमण या बीमारी जल्दी से ठीक नहीं होती। अगर आपको वायरल खांसी जुखाम / कोई भी बैक्टीरियल इन्फेक्शन हो जाए तो जल्द राहत नहीं मिलेगी। छोटी-छोटी चोटे जो अपने आप ही ठीक हो जाती है बड़े घाव बन जाते है।

9. त्वचा का रोग
        मधुमेह की शुरूआती स्टेज में त्वचा सम्बन्धी कई रोग होने शुरू हो आजाते है। त्वचा के सामान्य संक्रमण बड़े घाव बन जाते है।

10. अनुवांशिक कारण
         अगर आपके परिवार में किसी अन्य सदस्य को मधुमेह की बीमारी है तो आपको सावधान रहने की आवश्यकता है। क्योंकि यह एक अनुवांशिक बीमारी भी हो सकती है।

           वैसे तो इस बीमारी को पूरी तरह खत्म नहीं किया जा सकता लेकिन हां, कुछ सावधानियां बरतकर आप इसे नियंत्रित अवश्य कर सकते है। उसके लिए जरुरी है की आपने डॉक्टर से सलाह ले और समय समय पर शुगर लेवल की जाँच कराते रहे।

           इसके अतिरिक्त मधुमेह के और भी अनेक लक्षण हैं जैसे- पीठ का तिरछापन, टांगों में भारीपन, सुन्न और सूजे हुए पैर, अत्यधिक प्यास, कमर में कड़ापन, नपुंसकता, बीच बीच में अपच की शिकायत, उत्तेजक पदार्थों को खाने की इच्छा, मूँह में शुष्कता, गुर्दों में पीड़ा का अनुभव, क्षय रोग का बुखार, उदासीनता, निराशापूर्ण मानसिक स्थिति, मौन विषाद, दुर्बलता, मोटापा, एवं ग्लानि आदि।

image from : https://pixabay.com

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