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मधुमेह यानि डाइबिटीज़ (Part 01)




दोस्तों, आज के इस लेख में हम आपको मधुमेह यानि डाइबिटीज़ के बारे में आसान भाषा में समझाने जा रहे है ताकि आप इस मधुमेह यानि डाइबिटीज़ से डरने की बजाय इसके उपाय के बारे जाने । इसमें आप देखेंगे की मधुमेह यानि डाइबिटीज़ क्या है, इसके लक्षण क्या है हमें क्या नुकसान हो सकता है और इसका संभावित इलाज क्या है ?

मधुमेह (डाइबिटीज़) का वैज्ञानिक परिचय क्या है ?
मधुमेह (डाइबिटीज़) को बैज्ञानिक शब्दावली में डायबिटीज मेलाइट्स के नाम से जाना जाता है यह यूनानी भाषा के शब्द ‘डाइबिटीज’ का अर्थ लैटिन भाषा के शब्द ‘मेलाइट्स’से मिलकर बना है। ‘डाइबिटीज’ का अर्थ है ”होकर निकलना” या “प्रवाहित होना” तथा ‘मेलाइट्स’ का अर्थ है मधु। इस प्रकार डाइबिटीज मेलाइट्स का अर्थ हुआ मधु (शक्कर) का प्रवाहित होना।

यह रोग शरीर की कार्य प्रणाली में हुई गड़बडिय़ों के परिणाम स्वरुप उत्पन्न होता है इसे शरीर के चयापचय (पाचनक्रिया) से संबंधित एक रोग के रूप में जाना जाता है जो अग्नाशय में स्थित विशेष लैंगरहैंस द्विपिकाओं द्वारा एक विशिष्ट हारमोन इन्सुलिन का पर्याप्त मात्रा में निर्माण न कर पाने के कारण होता है। यह हार्मोन शरीर को शर्करा के सामान्य प्रयोग के लिए योग्य बनाता है। इसकी कमी के फलस्वरूप रक्त में शर्करा की मात्रा बढ़ जाती हैं जब यह एक निर्धारित स्तर तक पहुँच जाती है तो गुर्दे इसके अतिरिक्त मात्रा को मूत्र में निष्कासित कर देते हैं। इसलिए रक्त शर्करा की अधिक मात्रा की जाँच के लिए चिकित्सकों द्वारा मूत्र के परिक्षण का परामर्श दिया जाता है मोटे शब्दों में कहें तो डायबिटीज का अर्थ है रक्त में चीनी की मात्रा का बढ़ जाना, जो इन्सुलिन के निर्माण में गड़बड़ी से होता है। इन्सुलिन का काम रक्त में चीनी के स्तर को नियंत्रण करना है।


भारत में मधुमेह की क्या स्थिति है?



पूरे विश्व में मधुमेह का फैलाव बढ़ रहा है। आज विश्व के 3 प्रतिशत से 12 प्रतिशत लोग या तो मधुमेह सी पीडि़त हैं अथवा उनके मधुमेह से पीडि़त हैं अथवा उनके मधुमेह से पीडि़त होने की संभवना है। समाचार पत्रों में प्रकाशित "विश्व स्वास्थय संगठन" की एक सर्वे रिपोर्ट के अनुसार " सन 2025 तक भारत दुनिया का डायबिटीक कैपिटल हो जाएगा। यानि उस वक्त तक डाइबिटीज के सबसे अधिक रोगी भारत में होंगे और उनकी संख्या यहाँ लगभग 5.7 करोड़ होगी। जहाँ तक देश की राजधानी दिल्ली का सवाल है तो यहाँ की कुल आबादी (लगभग 1.45 करोड़ ) के 12 फीसदी लोग डाइबिटीज के घोषित मरीज हैं"

"भारतीय मधुमेह संगठन" के अनुसार शहरी जीवन शैली में बदलाव, अधिक मसालेदार भोजन, कम व्यायाम, बढ़ता तनाव, जेनेटिक तथा पर्यावरणीय कारणों से मधुमेह का खतरा 60 गुना तक अधिक बढ़ जाता है । मधुमेह के रोगियों में अन्य रोगियों की तुलना में हृदयघात का तीन गुना अधिक हो जाता है ।


उपर्युक्त आंकड़े यह स्पष्ट संकेत करते हैं की मधुमेह एक गंभीर समस्या के रूप में उभर कर हमारे सामने आया है । समाचार पत्रों में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार लगभग चार करोड़ भारतीय मधुमेह के साथ जी रहे हैं ।


क्या भारत में मधुमेह रोग अभी फैला है?
भारत में मधूमेह का इतिहास काफी पुराना है। ईसा पूर्व पाँचवी शताब्दी में भारत के प्रसिद्ध चिकित्सा विज्ञानी सूश्रूत ने मधूमेह का वर्णन किया था। उन्होंने कहा था कि इस रोगी का मूत्र मीठा हो जाता है। मधुमेह से बचने के लिए उनहोंने उपवास, मीठे पदार्थों से परहेज तहत जड़ी-बूटियों के सेवन की सलाह की थी ।

बच्चों, युवा एवं वयस्क पुरूषों/महिलाओं में से मधुमेह किसे अधिक प्रभावित करता है?
        हालाँकि मधुमेह बच्चों को उतना प्रभावित नहीं करता जितना की वयस्कों को फिर भी यह एक शिशु को भी प्रभावित कर सकता है । ऐसा देखा गया है कि मधुमेह से पीडि़त वयस्क प्राय: 45 वर्ष से 55 वर्ष तक की आयु के मध्य के होते हैं। मधुमेह से ग्रस्त युवाओं में प्राय: वंशानुगत कमजोरी होती है तथा कई बार तो यह कमजोरी अत्यधिक गंभीर हो जाती है। मधुमेह से ग्रस्त तीन लोगों में से दो महिलाएँ होती हैं। आविवाहित स्त्रियों की अपेक्षा विवाहित स्त्रियों में मधुमेह का प्रतिशत बहुत अधिक पाया जाता है इसका कारण अभी तक स्पष्ट नहीं हो सका है पर ऐसा माना जाता है कि इसका संबंध गर्भावस्था के दौरान होने वाले ग्रंथिमय परिवर्तनों से है। ये परिवर्तन शरीर द्वारा स्टार्च और शर्करा का इस्तेमाल किए जाने के तरीकों को प्रभावित कर सकते हैं। मधुमेह किन लोगों में अधिक पाया जाता है ? मधुमेह ऐसे लोगों में प्राय: अधिक पाया जाता है जो कार्यालय के बैठे रहने वाले कामकाज उत्पन्न मानसिक तनाव से थक जाते हैं या जो अपने कार्यों की आधिकता की वजह से प्राय: तनावग्रस्त रहते हैं तथा जिनके पास व्यायाम करने के लिए समय अभाव होता है। मधुमेह दुबले- पतले की अपेक्षा मोटे लोगों को अधिक प्रभावित करता है। 




आधुनिक वैज्ञानिक खोजें इस तथ्य की ओर संकेत करती हैं कि मधुमेह के प्रादुर्भाव में मानसिक कारणों का बहुत बड़ा योगदान है। अत्यधिक तनाव, किसी अत्याधिक प्रिय का वियोग तथा नौकरी एवं व्यवसाय की बार-बार की तकलीफें कई बार स्वास्थ्य को प्रभावित करके प्रत्यक्ष रूप से अमाशय संबंधी गंभीर गड़बडिय़ां उत्पन्न कर देती हैं जिसका परिणाम मधुमेह के रूप में हमारे सामने आता है। यही नहीं कई बार कतिपय दवाएँ भी व्यक्ति को अस्थायी मधुमेह का शिकार बना देती हैं ।

ऐसा देखा गया है कि उन लोगों में मधुमेह का पूर्व इतिहास होने की संभावना अधिक होती है जिनके परिवार में मधुमेह का पूर्व इतिहास रहा हो या जो मोटापे से ग्रस्त हों। "विश्व स्वास्थय संगठन" ने भी मोटापे को मधुमेह का एक बड़ा कारण माना है। इसके अलावा ऐसे व्यक्ति जिनके रक्त में शर्करा का स्तर तनाव की स्थिति में सामान्य से अधिक हो जाता है तथा बार–बार गर्भपात कराने वाली तथा जन्मजात विकृतियों से ग्रस्त बच्चों को जन्म देने वाली महिलाओं में भी मधुमेह की संभावना अधिक होती है ।

image from : https://pixabay.com

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